मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव की तारीख नज़दीक आने के साथ ही सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. पूरे देश की निगाहें इस समय मुंबई बीएमसी चुनाव पर टिकी हैं, जिसे महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है.एक तरफ ठाकरे बंधु यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए यह चुनाव राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है, तो दूसरी ओर बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने किसी भी कीमत पर मुंबई में अपना मेयर बैठाने का संकल्प ले लिया है.
महाराष्ट्र निकाय चुनावों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप, मराठी बनाम गैर-मराठी वोट बैंक, विकास बनाम पहचान की राजनीति और अंदरूनी खींचतान के बीच एक सर्वे रिपोर्ट ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. सर्वे के आंकड़े जहां ठाकरे बंधुओं को थोड़ी सफलता का संकेत दे रहे हैं, वहीं बीजेपी-शिंदे गुट को स्पष्ट बढ़त दिखा रहे हैं.
सर्वे क्या कहता है? किसका पलड़ा भारी?
AsceIndia संस्था की तरफ से जारी सर्वे के मुताबिक, मुंबई में मराठी वोटरों का बड़ा हिस्सा ठाकरे बंधुओं के साथ खड़ा नजर आ रहा है, लेकिन गैर-मराठी वोटरों का भारी समर्थन बीजेपी और शिंदे गुट को मिलने की संभावना है. वहीं मुस्लिम वोटर्स के बीच कांग्रेस अब भी सबसे पसंदीदा पार्टी बनी हुई है.
इस सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग 41 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को वोट देने के इच्छुक हैं. इसके बाद, शिवसेना ठाकरे समूह और एमएनएस गठबंधन को 28 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है. वहीं केवल 11 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स का झुकाव बीजेपी और शिंदे शिवसेना गठबंधन की तरफ है. ऐसे में मौजूदा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि मुंबई महानगरपालिका में बीजेपी-शिवसेना का मेयर बैठना लगभग तय माना जा रहा. हालांकि ठाकरे बंधुओं की पार्टियां कितनी सीटें हासिल कर पाती हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है.
राज ठाकरे को लगा कैसा झटका?
इस सियासी उथल-पुथल के बीच राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को चुनाव से ठीक पहले बड़ा झटका लगा है. मनसे के वरिष्ठ नेता और कट्टर मनसैनिक माने जाने वाले संतोष धुरी की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है. बीजेपी नेता नितेश राणे की पहल पर हुई इस मुलाकात को मनसे में संभावित टूट के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

दरअसल, मुंबई महापालिका के वॉर्ड नंबर 192 और 194 को लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के बीच विवाद चल रहा था. बाद में समझौते के तहत वॉर्ड 192 मनसे को और वॉर्ड 194 शिवसेना (यूबीटी) को दिए जाने पर सहमति बनी. लेकिन वॉर्ड 194 से चुनाव लड़ने के इच्छुक पूर्व नगरसेवक संतोष धुरी इस फैसले से नाराज़ बताए जा रहे थे. इसके बाद उनके कुछ समय तक नॉट-रिचेबल रहने और अब मुख्यमंत्री से मुलाकात करने से मनसे की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
चुनाव आयोग का ताबड़तोड़ एक्शन
उधर, चुनावी सरगर्मी के बीच चुनाव आयोग ने भी सख्त रुख अपनाया है. मुंबई के देवनार इलाके में फ्लाइंग स्क्वाड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वैन से 2 करोड़ 33 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं. आचार संहिता लागू रहने के दौरान इतनी बड़ी रकम की बरामदगी से हड़कंप मच गया है. संबंधित कर्मचारियों का दावा है कि यह रकम एटीएम में जमा करने के लिए ले जाई जा रही थी, लेकिन इनकम टैक्स विभाग और पुलिस मामले की गहन जांच कर रहे हैं. फिलहाल यह नकदी पुलिस हिरासत में सुरक्षित रखी गई है.
कब होगी निकाय चुनाव की वोटिंग, कब आएगा रिजल्ट?
महाराष्ट्र की सभी 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे. चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते चुनाव आयोग अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है और किसी भी गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.
कुल मिलाकर मुंबई महानगरपालिका चुनाव अब सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की सियासत में भविष्य की तस्वीर तय करने वाला बड़ा राजनीतिक संग्राम बन चुका है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सर्वे के अनुमान जमीनी हकीकत में कितने सही साबित होते हैं और मुंबई की सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ जाती है.
















