ईरान इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है। देश में जारी हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच अब तक करीब 11 हजार लोगों की मौत की खबरों ने हालात को और भयावह बना दिया है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाते हुए प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा देने का फरमान जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद देशभर में डर और असंतोष का माहौल और गहरा गया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि बड़ी संख्या में लोगों को बिना निष्पक्ष सुनवाई के सजा दी जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की आलोचना तेज हो गई है।
दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखा बयान देकर हालात को और भड़का दिया है। ट्रंप ने खुले मंच से ‘मदद भेजने’ का ऐलान करते हुए ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उनके इस बयान के बाद ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की अटकलें तेज हो गई हैं। मिडिल ईस्ट पहले ही गाजा, इजरायल और यमन जैसे मोर्चों पर तनाव से जूझ रहा है और अब ईरान में बढ़ता संकट पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।
इन हालातों को देखते हुए भारत सरकार भी सतर्क हो गई है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने भारतीयों से कहा है कि वे जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। यह सलाह छात्रों, कारोबारियों, पेशेवरों और अन्य सभी भारतीय नागरिकों के लिए जारी की गई है। दूतावास ने यह भी कहा है कि जो लोग फिलहाल ईरान छोड़ने में असमर्थ हैं, वे भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और दूतावास के संपर्क में बने रहें।
ईरान में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। सख्त सरकारी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित विदेशी हस्तक्षेप ने आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के लिए एक बड़े युद्ध में बदल सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान, अमेरिका और वैश्विक ताकतें क्या कदम उठाती हैं।
















