मुजफ्फरनगर में फर्जी जीएसटी कंपनियों का बड़ा खुलासा, करोड़ों की राजस्व हानि करने वाला गिरोह गिरफ्तार.

मुजफ्फरनगर जनपद में थाना साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े फर्जी जीएसटी बिलिंग गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह देशभर में फर्जी कंपनियां रजिस्टर कर उनके जीएसटी नंबरों के जरिए नकली बिल और ई-वे बिल तैयार कर सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि पहुंचा रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और एक कार बरामद की है।यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शासन द्वारा चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। मेरठ जोन और सहारनपुर परिक्षेत्र के उच्चाधिकारियों के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध और थाना प्रभारी साइबर क्राइम की टीम ने मुखबिर की सूचना पर इस गिरोह को दबोचा।

गिरफ्तार अभियुक्तों में अफजल निवासी मल्हूपुरा थाना सिविल लाइन, मोनिस अली निवासी मल्हूपुरा थाना सिविल लाइन और मोहम्मद हफीज निवासी ग्राम तिगरी थाना नई मंडी शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से 6 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क, एक इंटरनेट डोंगल, 3 रबर स्टाम्प मोहर, एक चेकबुक, 12 डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट यूएसबी, 2 कीबोर्ड, 2 प्रिंटर, 3 लैपटॉप चार्जर, एक क्रेटा कार, आधार कार्ड, पैन कार्ड, सिम कार्ड और 34 जीएसटी फर्मों से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं।पुलिस पूछताछ में अभियुक्त मोहम्मद हफीज ने बताया कि वह एलएलबी पास है और अकाउंटिंग व जीएसटी का कार्य करता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात मोनिस और अफजल से हुई। तीनों ने मिलकर यह योजना बनाई कि गरीब और भोले-भाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम से फर्जी जीएसटी फर्में पंजीकृत कराई जाएं और उनके जरिए नकली बिल व ई-वे बिल तैयार कर जरूरतमंदों को उपलब्ध कराए जाएं। इससे उन्हें मोटा मुनाफा होता था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि मोहम्मद हफीज और मोनिस फर्मों की अकाउंटिंग और जीएसटी से जुड़ा पूरा तकनीकी काम संभालते थे, जबकि अफजल आधार कार्ड, पैन कार्ड जुटाने, बैंक खाते खुलवाने और गोदाम या पते की व्यवस्था करता था। अफजल ने स्वीकार किया कि वह पहले से ऐसे लोगों के संपर्क में था जो फर्जी जीएसटी बिलिंग से भारी संपत्ति बना चुके थे, जिससे वह भी लालच में आ गया।पुलिस के अनुसार, गिरोह ने अब तक करीब 40 से 50 फर्जी फर्मों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये से अधिक के नकली जीएसटी और ई-वे बिल तैयार किए हैं। इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है। साइबर क्राइम पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि राजस्व चोरी और साइबर अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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