हरियाणा के हिसार जिले के खासा महाजनान गांव से सामने आया जातिगत भेदभाव का मामला समाज को झकझोर देने वाला है। यहां श्मशान घाट में भी अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अलग श्मशान बनाए जाने का आरोप सामने आया है। इस गंभीर मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट तलब की है।जानकारी के अनुसार, गांव में वर्षों से ऊंची जातियों और अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अलग-अलग श्मशान घाट का उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि अनुसूचित जाति के लोगों को मुख्य श्मशान में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे उन्हें अलग स्थान पर दाह संस्कार करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक समानता और मानव गरिमा पर भी सीधा प्रहार है।
मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी यदि श्मशान जैसे अंतिम संस्कार स्थल पर जाति के आधार पर भेदभाव हो रहा है, तो यह प्रशासन और समाज दोनों की विफलता है। संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और मृत्यु के बाद भी किसी के साथ भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से इस पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पीड़ित समुदाय को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और गांव के दोनों पक्षों से बातचीत की जा रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि कानून के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार दिलाए जाएंगे और किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यह मामला एक बार फिर देश में जमीनी स्तर पर मौजूद जातिगत सोच को उजागर करता है। सवाल यह है कि जब कानून और संविधान समानता की बात करते हैं, तो समाज के कुछ हिस्सों में आज भी भेदभाव क्यों जिंदा है। अब देखना होगा कि NHRC की सख्ती और प्रशासन की कार्रवाई इस सोच को बदलने में कितनी प्रभावी साबित होती है।















