मुजफ्फरनगर में कला, साहित्य और संस्कृति का संगम,

मुजफ्फरनगर की प्रतिनिधि साहित्यिक संस्था सकल साहित्य समाज के तत्वावधान में कला, साहित्य और संस्कृति को केंद्र में रखते हुए एक अनूठा और गरिमामयी कार्यक्रम आयोजित किया गया। नए साल के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक था ‘नई साल में मित्रों के साथ पहली गुफ्तगू’, जिसमें शहर के साहित्यप्रेमियों, रचनाकारों और कला से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में फिल्म अभिनेता शैलेन्द्र गौड़ उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर फिल्म निर्माण से जुड़े वर्ष भटनागर ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. प्रदीप जैन ने की तथा संचालन की जिम्मेदारी कमल त्यागी ने कुशलतापूर्वक निभाई। पूरे आयोजन में साहित्यिक गरिमा, आत्मीयता और रचनात्मक संवाद का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान रहा। इस अवसर पर ब्रजेश्वर सिंह त्यागी, प्रकाश सूना, संतोष शर्मा और रामकुमार शर्मा रागी को सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मान के अंतर्गत सभी साहित्यकारों को माल्यार्पण कर सम्मान ट्रॉफी और शॉल भेंट किए गए। सम्मान समारोह के पश्चात सभी सम्मानित साहित्यकारों ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने भावविभोर होकर सराहा।

मुख्य अतिथि शैलेन्द्र गौड़ ने काव्य पाठ के बाद अपने उद्बोधन में फिल्म जगत के संघर्ष और संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री संघर्ष की धरती है, जहां बार-बार प्रयास करना पड़ता है और उम्मीद हमेशा जीवित रहती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मुंबई की रफ्तार के साथ कदम मिलाकर चलता है, उसे देर-सबेर काम जरूर मिलता है। सपनों, उम्मीदों और रंगों से भरा यह शहर कलाकारों की परीक्षा भी लेता है और उन्हें पहचान भी देता है।

विशिष्ट अतिथि वर्ष भटनागर ने मुजफ्फरनगर प्रवास के अनुभव साझा करते हुए शहर की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में मुजफ्फरनगर एक पूर्ण विकसित शहर है, जहां जरूरी वस्तुएं वाजिब दामों पर उपलब्ध हैं। उन्होंने यहां के लोगों के अपनत्व, भाईचारे और सहज व्यवहार की प्रशंसा करते हुए कहा कि पहली बार आने के बावजूद उन्हें कभी परायापन महसूस नहीं हुआ। उन्होंने शहर के खुले वातावरण, शुद्ध भोजन, ताजी हवा और सादगी भरे जीवन को महानगरों की व्यस्त और संकुचित जीवनशैली से बेहतर बताया।

कार्यक्रम अध्यक्ष डा. प्रदीप जैन ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम साहित्य और संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और समाज को रचनात्मक दिशा देते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि शैलेन्द्र गौड़ और विशिष्ट अतिथि वर्ष भटनागर को भी सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपनी रचनात्मक सहभागिता से कार्यक्रम को यादगार और गरिमामयी बना दिया।

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