राजगढ़ के बडला वन क्षेत्र में अवैध खनन का कहर, पहाड़ी को किया धराशायी.

राजगढ़ (अलवर)। न्यायालय द्वारा वन क्षेत्रों में अवैध खनन पर स्पष्ट रोक के बावजूद राजगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र में खुलेआम नियमों की अनदेखी की जा रही है। राजगढ़–टहला सड़क मार्ग पर स्थित बडला ग्राम के वन क्षेत्र की पहाड़ियों में खनन माफिया ने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां अंजाम दी हैं। करीब एक किलोमीटर की परिधि में फैली लगभग सौ फीट ऊंची पहाड़ी को जेसीबी मशीनों और ब्लास्टिंग के जरिए काटकर लगभग समतल कर दिया गया है, जो वन संपदा के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

मौके पर पहुंचने पर हालात और भी चौंकाने वाले नजर आए। जेसीबी और ट्रैक्टरों के पहियों के ताजा निशान साफ दिखाई दिए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हाल ही में तड़के के समय अवैध खनन किया गया है। धरातल क्षेत्र में पत्थरों की खुदाई के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं। इससे अंदेशा है कि एक संगठित माफिया समूह लंबे समय से यहां सक्रिय है और जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता का फायदा उठा रहा है।बडला ग्राम से पैदल चलते हुए बडला बांध की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ते ही उजड़ी हुई पहाड़ियों का दृश्य सामने आता है। वन क्षेत्र के भीतर जगह-जगह अवैध रूप से खनित पत्थरों के ढेर लगे हुए हैं। यह रास्ता स्थानीय ग्रामीणों के आवागमन का भी है, ऐसे में अवैध खनन से सुरक्षा और पर्यावरण दोनों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ियों के कटाव से वन्यजीवों का आवास नष्ट हो रहा है और बरसात के मौसम में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन आखिर किसकी शह पर हो रहा है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद यदि जेसीबी और ब्लास्टिंग जैसी गतिविधियां चल रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न के बराबर होती है, जिससे माफिया के हौसले बुलंद हैं।पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए, दोषियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएं और क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र के पुनर्स्थापन की योजना बनाई जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो बडला का यह वन क्षेत्र पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर पहुंच सकता है।

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