हिजाब वाली PM के बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का पलटवार, बोले– भारत की महिला प्रधानमंत्री साड़ी पहनेगी

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। इस बयान पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण और समाज को बांटने वाला करार दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की परंपरा, संस्कृति और पहचान के अनुरूप अगर कोई महिला प्रधानमंत्री बनती है, तो वह साड़ी पहनेगी, हिजाब नहीं।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को समान अवसर मिले हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश को अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रपति और हामिद अंसारी जैसे उपराष्ट्रपति मिल चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत में किसी भी समुदाय के व्यक्ति को उच्च पद तक पहुंचने से रोका नहीं गया। इसके बावजूद इस तरह के बयान देकर समाज में अलगाव पैदा करना ठीक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का पद किसी धर्म या पहनावे से नहीं, बल्कि संविधान, संस्कृति और देश की एकता से जुड़ा होता है। भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं को नजरअंदाज किया जाए। उनके अनुसार साड़ी भारत की महिला संस्कृति का प्रतीक है और यह देश की सभ्यता को दर्शाती है।

रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि राजनीति में ऐसे बयान केवल वोट बैंक की राजनीति को मजबूत करने के लिए दिए जाते हैं। इससे युवाओं में गलत संदेश जाता है और समाज में अनावश्यक विवाद खड़े होते हैं। उन्होंने अपील की कि नेताओं को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जो देश की एकता और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

वहीं, ओवैसी के बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, तो कई इसे धार्मिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में अक्सर सुर्खियों में बने रहने के लिए दिए जाते हैं।

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