मुजफ्फरनगर में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और वाहन चालकों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से ‘नो हेलमेट नो हाईवे’ अभियान को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत एवं सहायक पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के. मिश्रा ने शहर से गुजरने वाले हाईवे पर विशेष अभियान चलाया। इस दौरान दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट हाईवे पर वाहन न चलाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और अन्य यातायात नियमों का अनुसरण करने के लिए जागरूक किया गया।
अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने हाईवे पर रुक-रुक कर दोपहिया वाहन चालकों से संवाद किया। बिना हेलमेट वाहन चला रहे लोगों को रोककर उन्हें सड़क सुरक्षा के महत्व के बारे में समझाया गया और बताया गया कि हेलमेट न पहनने से दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोट या जान जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हेलमेट केवल चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन रक्षक सुरक्षा उपकरण है, जिसे हर हाल में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।वहीं दूसरी ओर, जो दोपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनकर और यातायात नियमों का पालन करते हुए वाहन चला रहे थे, उनकी पुलिस अधिकारियों द्वारा खुले तौर पर सराहना की गई। ऐसे चालकों की प्रशंसा करते हुए उन्हें सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित किया गया, ताकि अन्य लोग भी उनसे सीख लेकर नियमों का पालन करें। पुलिस का मानना है कि सकारात्मक प्रोत्साहन से भी लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया जा सकता है।
पुलिस अधीक्षक नगर ने बताया कि जिले में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में कमी लाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। हाईवे पर तेज रफ्तार, गलत साइड से वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना और सीट बेल्ट का प्रयोग न करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा समय-समय पर चेकिंग, जागरूकता अभियान और कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
मुजफ्फरनगर पुलिस ने समस्त वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखें। दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट का प्रयोग करें, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाएं, निर्धारित गति सीमा का पालन करें और नशे की हालत में वाहन चलाने से बचें। पुलिस का कहना है कि यातायात नियमों का पालन कर ही सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बना जा सकता है। पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि इस अभियान से लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आएगा और सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जाएगी।

















