भारत की आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित करने वाले युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती सोमवार को देशभर में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।12 जनवरी का यह दिन न केवल उनके जन्म का स्मरण कराता है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को आत्मविश्वास, सेवा और राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित भी करता है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित कई दिग्गजों ने स्वामी जी को नमन किया। उनके विचार आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रकाश स्तंभ की तरह हैं, जो न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि समाज और राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान, विकसित भारत का आधार है युवा ऊर्जा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए उन्हें भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे मजबूत स्रोत बताया। पीएम ने जोर देकर कहा कि स्वामी जी का व्यक्तित्व और उनके क्रांतिकारी विचार ‘विकसित भारत’ के हमारे संकल्प को नई शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वामी जी के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रधानमंत्री के अनुसार, स्वामी विवेकानंद का अटूट विश्वास था कि युवा शक्ति ही वह धुरी है, जिससे देश का कायाकल्प संभव है।
राष्ट्रपति मुर्मू और गृह मंत्री शाह ने किया विचारों का स्मरण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वामी जी के संदेशों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सेवा, आत्मबल और मानवता को जीवन का वास्तविक आधार बताया। उन्होंने भारत के प्राचीन दर्शन और ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में अद्वितीय भूमिका निभाई।
वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने स्वामी विवेकानंद को युवाओं का सच्चा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से न केवल समाज सेवा का मार्ग दिखाया, बल्कि युवाओं को भारतीय अध्यात्म और अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। उनके विचार आज भी युवाओं के भीतर कर्तव्य और जिम्मेदारी की भावना जागृत करते हैं।
शिकागो से आज तक, प्रासंगिक है स्वामी जी का संदेश
12 जनवरी 1893 को शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक भाषण से विश्व को भारत की आध्यात्मिक शक्ति का परिचय कराने वाले नरेंद्रनाथ दत्त (स्वामी विवेकानंद) के विचार आज भी उतने ही जीवंत हैं। युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अनुसार, स्वामी जी का युवाओं की असीम क्षमता पर जो अटूट विश्वास था, वह आधुनिक भारत की प्रगति के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
स्वामी विवेकानंद के प्रमुख संदेश और योगदान
- आत्मविश्वास: स्वयं पर विश्वास ही सफलता की पहली सीढ़ी है।
- राष्ट्र निर्माण: युवाओं का जोश और मेहनत ही देश को हर लक्ष्य तक पहुँचा सकती है।
- सेवा और मानवता: दूसरों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
- निरंतर प्रयास: जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, तब तक रुकना नहीं चाहिए।
स्वामी विवेकानंद की यह जयंती हमें दोबारा स्मरण कराती है कि आत्मविश्वास और सेवा भाव के साथ किया गया निरंतर प्रयास ही व्यक्ति और राष्ट्र को उन्नति के शिखर पर ले जा सकता है।
















