रूसी तेल पर ट्रंप की सख्ती: भारत को और टैरिफ की चेतावनी, द्विपक्षीय रिश्तों में बढ़ा तनाव

रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी बयानबाज़ी ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई तल्खी पैदा कर दी है। 2026 की शुरुआत में ट्रंप ने एक बार फिर भारत को चेतावनी दी है कि यदि वह रूस से तेल खरीद जारी रखता है तो उस पर और अधिक टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “अच्छा आदमी” बताते हुए यह भी कहा कि उन्हें पहले से पता था कि पीएम मोदी इस मुद्दे पर खुश नहीं हैं, लेकिन अमेरिका की नाराज़गी बनी हुई है।

ट्रंप का कहना है कि रूस से तेल की खरीद न केवल अमेरिका की नीतियों के खिलाफ है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करती है। उन्होंने दावा किया कि भारत को पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है और यदि रूसी तेल का आयात नहीं रोका गया तो और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। ट्रंप ने बार-बार यह दोहराया कि पीएम मोदी जानते हैं कि वह इस “सौदे” से संतुष्ट नहीं हैं।

हालांकि भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि रूसी तेल को लेकर अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ऊर्जा आयात करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान ऐसे समय पर आए हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही अस्थिर हैं। भारत, जो दुनिया का एक बड़ा ऊर्जा आयातक है, सस्ते रूसी तेल को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए अहम मानता है। वहीं अमेरिका चाहता है कि उसके रणनीतिक साझेदार उसकी विदेश नीति के अनुरूप कदम उठाएं।

इस पूरे घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और ऊर्जा नीति को लेकर और खींचतान देखने को मिल सकती है। अब यह देखना अहम होगा कि दोनों देश कूटनीतिक स्तर पर इस तनाव को कैसे संभालते हैं।

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