पिछले 15 दिनों में ईरान की सड़कों पर कौन से नारे सबसे ज्यादा गूंजे?

ईरान में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह धीरे-धीरे सत्ता और पूरे शासन तंत्र के खिलाफ बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि अब तक कम से कम 217 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत गोली लगने से हुई बताई जा रही है, जिसने देश और दुनिया में चिंता बढ़ा दी है।

तनाव के बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान सामने आया है, जिसने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। सरकारी टीवी पर दिए गए बयान में अधिकारी ने माता-पिता को चेतावनी दी कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें और अगर किसी को गोली लगती है तो बाद में शिकायत न करें। इस बयान को कई लोग खुली धमकी के तौर पर देख रहे हैं, जिससे आम जनता में डर और गुस्सा दोनों बढ़ गए हैं।

विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और खराब आर्थिक हालात को लेकर हुई थी। प्रतिबंधों, मुद्रा की गिरती कीमत और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया था। इन्हीं मुद्दों को लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन सरकार और सुरक्षाबलों की सख्त कार्रवाई ने आंदोलन की दिशा बदल दी।

जैसे-जैसे पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज होती गई, प्रदर्शनकारियों का आक्रोश भी बढ़ता गया। कई इलाकों में हिंसक झड़पों की खबरें सामने आईं। इंटरनेट बंद करने, कर्फ्यू जैसे हालात और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों के बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। कुछ ही दिनों में विरोध प्रदर्शन सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ सीमित न रहकर पूरे सिस्टम को बदलने की मांग में तब्दील हो गया।

अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि लोग खुलकर सत्ता को चुनौती देते नजर आ रहे हैं। सड़कों पर लगाए जा रहे नारे और प्रदर्शनकारियों के संदेश इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यह आंदोलन केवल तात्कालिक समस्याओं का नहीं, बल्कि लंबे समय से जमा असंतोष का नतीजा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल ईरान में डर, आक्रोश और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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